Friday, January 25, 2013

Darr


एक  डर है सीने  में दबा ,
डर है तुमसे दूर जाने का 
डर है तुमको खो देने  का !

ये डर नहीं होता मुझसे जुदा ,
प्यार  करता है ये दिल तुझसे बहुत,
लेकिन करूँ क्या इस जालिम दुनिया का ,
न मिलने देने की कसम खा रखी है ,
कैसे करूँ इस मुश्किल का सामना,
तू ही बता !!

तुझसे प्यार किया, बिना सोचे समझे किया,
सोच समझकर  किया होता तो प्यार कैसा?
तेरे ख्यालों बिन जिया जाता नहीं है अब ,
तुझ संग बातें किये बिना चैन आता नहीं है अब,

जीना है तो तेरे संग है, तुझ बिन जीने का नहीं कोई मतलब ,
लेकिन मनाऊं कैसे इन रस्मों रिवाजों को, तू ही बता!