चाह थी,
आँखों में अपने तेरे सपने संजोने की
बाहों में तेरी अपनी जिंदगी बिताने की
पर मुझको ये मालूम न था, तू मेरी न थी
चाह थी,
दुनिया की नजरों से तुझे बचाकर रखने की
तेरी हर हसरत को अपना बनाने की
पर मुझको ये मालुम न था, तू मेरी न थी
आँखों में अपने तेरे सपने संजोने की
बाहों में तेरी अपनी जिंदगी बिताने की
पर मुझको ये मालूम न था, तू मेरी न थी
चाह थी,
दुनिया की नजरों से तुझे बचाकर रखने की
तेरी हर हसरत को अपना बनाने की
पर मुझको ये मालुम न था, तू मेरी न थी
चाह थी,
तेरे पलकों के साये में, अपनी दुनिया बसाने की
चुमके तेरा हाथ, तेरे साथ चलने की
पर मुझको ये मालुम न था, तू मेरी न थी.
तेरे पलकों के साये में, अपनी दुनिया बसाने की
चुमके तेरा हाथ, तेरे साथ चलने की
पर मुझको ये मालुम न था, तू मेरी न थी.
No comments:
Post a Comment